शंका - संक्रांति (14 जनवरी 2026) को खिचड़ी दान का विशेष महत्व एवं परंपरा है। जबकि एकादशी को अन्न खाने वाला एवं दान देने वाला दोनों ही पाप (नरक) का भागी होता है। जब संक्रांति को ही एकादशी भी उपस्थित हो जाए तो इस परिस्थिति में क्या करें ?
समाधान - संकल्प विधि (मानसिक दान) ही श्रेष्ठ है।
एकादशी होने के कारण इस बार संक्रांति में खिचड़ी का विधान त्याज्य होगा। खिचड़ी दान या सेवन पुण्य का कार्य है, जबकि एकादशी में अन्न भक्षण पाप का कारण बनता है। पुण्य भले ही न हो, लेकिन पाप कर्म से बचना चाहिये। यदि आप बहुत कड़े नियमों का पालन करते हैं और एकादशी को अन्न छूना भी नहीं चाहते, तो आप 'संकल्प विधि' अपना सकते हैं:
संक्रांति (एकादशी) के दिन हाथ में जल लेकर खिचड़ी दान (एक दिन पहले ही सामग्री को अलग निकाल कर रख दें।) करने का 'संकल्प' लें।
अगले दिन (द्वादशी को) सूर्योदय के बाद उस सामग्री को ब्राह्मण को प्रदान कर दें। शास्त्र कहते हैं कि संकल्प जिस समय किया गया, पुण्य उसी समय का माना जाता है।
ध्यान दें - जहाँ पुण्यकाल 15 जनवरी को होगा। वहाँ तो कोई विवाद ही नहीं है।
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