गोपथ ज्योतिष पद्धति के प्रणेता - आचार्य सोहन वेदपाठी , सम्पर्क सूत्र - WA 9463405098
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प्रथम नक्षत्र कथा: अश्विनी – "वेग और संजीवनी का रहस्य"
प्राचीन काल में पूर्व दिशा के एक समृद्ध राज्य में एक अत्यंत ऊर्जावान और चंचल बालक का जन्म हुआ। वह बालक एक क्षण भी शांत नहीं बैठता था; उसके भीतर जैसे किसी अदृश्य अश्व (घोड़े) की गति और चपलता समाई थी। उसकी बुद्धि अत्यंत कुशाग्र थी, लेकिन उसकी असीमित ऊर्जा को एक सही दिशा की आवश्यकता थी।
एक बार, राज्य में एक भयंकर ज्वर (बुखार) की महामारी फैली। दुर्भाग्यवश, वह बालक भी इस महामारी की चपेट में आ गया। लगातार ९ दिनों तक उसे तीव्र कष्ट रहा और राज्य के सभी वैद्य हार मान चुके थे।
तब, मोक्ष और रहस्य के कारक केतु (अश्विनी के स्वामी ग्रह) की कृपा से, श्वेत वस्त्र धारण किए हुए दो दिव्य वैद्य वहाँ प्रकट हुए। ये देवताओं के चिकित्सक अश्विनी कुमार थे। उनके हाथों में अमृत कलश था और वे घोड़ों के रथ पर सवार थे।
उन्होंने बालक की नाड़ी जांची और कहा, "इस बालक की नाड़ी 'आदि' (वात प्रकृति) है। इसकी बीमारी का कारण इसकी ऊर्जा का असंतुलन है, क्योंकि इसका जन्म गंडमूल के संधिकाल में हुआ है।"
अश्विनी कुमारों ने बालक को 'कुचला' (विषमुष्टि) नामक जड़ी-बूटी का अर्क पिलाया और उसे एक पौधा सौंपते हुए कहा, "हे बालक! तुम्हारी बीमारी (विष नाड़ी का दोष) शांत हो गई है। अब से तुम्हें गुरुवार (क्षिप्र संज्ञक दिन) के दिन इस कुचला वृक्ष की सेवा करनी होगी। यही तुम्हारी चंचलता को एकाग्रता में बदलेगा।"
स्वस्थ होने पर, बालक ने उन दिव्य कुमारों से ही चिकित्सा का गूढ़ ज्ञान प्राप्त किया। उसकी गति इतनी क्षिप्र (तेज) थी कि वह पलक झपकते ही दूर-दराज के रोगियों तक पहुँचकर उनकी जान बचा लेता।
बड़ा होकर वह बालक केवल एक साधारण व्यक्ति नहीं रहा। अपने अश्व-रूपी वेग के कारण वह राज्य का सबसे तेज धावक (खिलाड़ी) और वीर सेनापति बना। साथ ही, अपनी विद्या से वह एक महान चिकित्सक के रूप में विख्यात हुआ। जब भी वह सुंदर आभूषण धारण करके अपने घोड़े पर सवार होकर निकलता, तो राजा से लेकर प्रजा तक सभी उसका सम्मान करते। उसने अपने जीवन के ८६ वर्ष लोक-कल्याण और गतिशीलता में व्यतीत किए।
कथा का ज्योतिषीय सार (विद्यार्थियों के लिए ):
प्रतीक व आकाशीय पहचान: घोड़े का सिर (आकाश में ३ तारों का समूह)। यह चपलता और वेग का प्रतीक है।
ग्रह, देवता व तत्व: स्वामी केतु (मार्गदर्शक), देवता अश्विनी कुमार (दिव्य वैद्य) और पृथ्वी तत्व।
स्वभाव व वर्ण: क्षिप्र/लघु संज्ञक, वैश्य वर्ण, आभूषण प्रेमी, राजपूज्य और कुशाग्र बुद्धि।
कॅरियर (आजीविका): चिकित्सक (Doctor), खिलाड़ी (Athlete), सेनापति/पुलिस, और वाहन/अश्व से जुड़े कार्य।
अरिष्ट (दोष) व उपाय: गंडमूल दोष, ५० घटी बाद विष नाड़ी (९ दिन का ज्वर/कष्ट)। उपाय: कुचला (विषमुष्टि) का वृक्ष लगाना और श्वेत वस्त्र धारण करके अश्विनी कुमारों की पूजा करना।
दिशा, गण, योनि व नाड़ी: पूर्व दिशा, देव गण, अश्व योनि, आदि नाड़ी (वात)।
चोरी/नष्ट प्रश्न (सुलोचनादि संज्ञा): अंधाक्ष (अंधा) – चोरी गई या खोई वस्तु पूर्व दिशा में है, घर के भीतर या आस-पास ही है और शीघ्र मिल जाएगी।
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