ज्योतिषीय कद निर्धारण प्रणाली
लग्न एवं नवमांश पर आधारित 8-सूत्रीय अंक पद्धति
लग्न कुण्डली (स्थूल शरीर)
- 1. लग्न राशि 1 अंक
- 2. लग्नेश ग्रह 1 अंक
- 3. लग्न में स्थित ग्रह 1 अंक
- 4. लग्न पर दृष्टि 1 अंक
नवमांश कुण्डली (सूक्ष्म शरीर)
- 5. नवमांश लग्न राशि 1 अंक
- 6. नवमांश लग्नेश ग्रह 1 अंक
- 7. नवमांश लग्न में स्थित ग्रह 1 अंक
- 8. नवमांश लग्न पर दृष्टि 1 अंक
ह्रस्व (लघु कद)
ग्रह: मंगल, केतु
मध्यम (सम कद)
ग्रह: सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र
दीर्घ (ऊँचा कद)
ग्रह: गुरु, शनि, राहु
2. कद का मानक पैमाना (पुरुष जातक हेतु)
- अतिदीर्घ कद: 6 फीट या उस से अधिक
- दीर्घ (ऊँचा) कद: 5 फीट 9 इंच से 5 फीट 11 इंच तक
- मध्यम कद: 5 फीट 6 इंच से 5 फीट 8 इंच तक
- ह्रस्व (लघु) कद: 5 फीट 2 इंच से 5 फीट 5 इंच तक
- अतिलघु कद: 5 फीट 1 इंच से कम
ध्यान दें - यह वर्गीकरण औसत कद 5'2" से 5'11" मानकर किया गया है। जिन क्षेत्रों में औसत कद इससे भिन्न हो वहाँ बदलाव करना पड़ेगा।
3. आठ प्रमुख घटक (प्रत्येक का 1 अंक)
कुण्डली का विश्लेषण करते समय निम्नलिखित 8 घटकों को 1-1 अंक आवंटित करें:
- लग्न राशि (लग्न में कौन सी राशि उदित है?)
- लग्नेश (लग्न के स्वामी ग्रह का स्वरूप)
- लग्न में स्थित ग्रह (लग्न भाव में बैठा ग्रह)
- लग्न पर दृष्टि (लग्न भाव को पूर्ण दृष्टि से देखने वाला ग्रह)
- नवमांश लग्न राशि (D9 लग्न की राशि)
- नवमांश लग्नेश (D9 लग्न के स्वामी ग्रह का स्वरूप)
- नवमांश लग्न में स्थित ग्रह (D9 लग्न में उपस्थित ग्रह)
- नवमांश लग्न पर दृष्टि (D9 लग्न को देखने वाला ग्रह)
- बहुमत नियम: जिस वर्ग (ह्रस्व, मध्यम या दीर्घ) के अंक सर्वाधिक होंगे, जातक का कद सामान्यतः उसी सीमा में रहेगा।
-
ह्रस्व एवं मध्यम के अंक बराबर होने पर:
- आधार कद 5 फीट 6 इंच (ह्रस्व-मध्यम संधि) माना जाएगा।
- यदि कुण्डली में दीर्घ वर्ग के भी अंक हैं, तो प्रति दीर्घ अंक +1 इंच जोड़ दें।
-
मध्यम एवं दीर्घ के अंक बराबर होने पर:
- आधार कद 5 फीट 9 इंच (मध्यम-दीर्घ संधि) माना जाएगा।
- यदि कुण्डली में ह्रस्व वर्ग के भी अंक हैं, तो प्रति ह्रस्व अंक -1 इंच घटा दें।
-
स्त्री जातक के लिए विशेष नियम:
- प्राकृतिक शारीरिक संरचना के अनुसार, प्राप्त मानक पुरुष कद में से 3 से 4 इंच घटाकर स्त्री जातक का अंतिम कद तय करें।
- लग्न: धनु (मध्यम) — 1 मध्यम
- लग्नेश: गुरु (दीर्घ) — 1 दीर्घ
- लग्नस्थ ग्रह: बुध (मध्यम) — 1 मध्यम
- लग्न पर दृष्टि: मंगल (ह्रस्व) — 1 ह्रस्व
- नवमांश लग्न: मीन (ह्रस्व) — 1 ह्रस्व
- नवमांश लग्नेश: गुरु (दीर्घ) — 1 दीर्घ
- नवमांश लग्नस्थ ग्रह: केतु (ह्रस्व) — 1 ह्रस्व
- नवमांश लग्न पर दृष्टि: चन्द्रमा (मध्यम) — 1 मध्यम
- ह्रस्व अंक: 3
- मध्यम अंक: 3
- दीर्घ अंक: 2
विशेष: यदि किसी भाव में एक से अधिक ग्रह बैठे हों या दृष्टि डाल रहे हों, तो प्रत्येक ग्रह को उसका स्वतंत्र 1 अंक प्रदान करें।
यदि सभी प्वाइंट ह्रस्व प्राप्त हो तो बौना (4'5" या उससे कम) एवं सभी प्वाइंट दीर्घ प्राप्त हो तो अतिदीर्घ (6' या उससे अधिक) समझें।
4. गणना एवं संधि के गणितीय नियम
प्राप्त अंकों का योग करने के बाद निम्नलिखित नियमों के आधार पर परिणाम निकालें:
5. व्यावहारिक उदाहरण से समझें
उदाहरण:
अंकों का कुल योग:
फलादेश गणना:
यहाँ ह्रस्व (3) और मध्यम (3) दोनों के अंक बराबर हैं, इसलिए संधि का आधार मान = 5 फीट 6 इंच। तालिका में दीर्घ के 2 अंक शेष हैं, अतः आधार मान में 2 इंच जोड़े जाएंगे। 5 फीट 6 इंच + 2 इंच = 5 फीट 8 इंच होगा।
अंतिम परिणाम: पुरुष जातक की लंबाई लगभग 5 फीट 8 इंच होगी। (यदि यह स्त्री जातक की कुण्डली होती, तो 3.5 इंच घटाने पर कद लगभग 5 फीट 4.5 इंच आता)।
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